हिंदू अवधारणा

योगYoga

yoga — मिलन — वे साधनाएँ जो स्व को परमात्मा से जोड़ती हैं

In short

योग (Yoga) का अर्थ है 'मिलन' — वह साधना-परिवार जो व्यक्तिगत स्व को परमात्मा या परम सत्ता से जोड़ता है। शारीरिक आसनों से कहीं व्यापक, इसमें निष्काम कर्म (कर्मयोग), भक्ति, ज्ञान और ध्यान (राजयोग) के मार्ग सम्मिलित हैं — हर एक स्थिरता और मुक्ति की ओर एक राह।

मिलनकर्म, भक्ति, ज्ञान, ध्यानसमत्व

समीक्षित — गोडिफाई टीम · अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026

इसका अर्थ

'योग' शब्द 'युज्' धातु से आया है, जिसका अर्थ है 'जोड़ना' — लक्ष्य है मिलन: व्यक्ति का परमात्मा से, और बिखरे मन का एक स्थिर केंद्र से। भगवद्गीता इसकी एक सर्वाधिक उद्धृत परिभाषा देती है — योग अर्थात समत्व, सफलता और असफलता में समान मन।

परंपरा भिन्न स्वभावों के अनुकूल कई योग बताती है: कर्मयोग (निष्काम कर्म), भक्तियोग (प्रेममयी भक्ति), ज्ञानयोग (ज्ञान), और राज या ध्यानयोग (ध्यान)। आज व्यापक रूप से प्रचलित आसन भी इसी बड़ी साधना का अंग हैं, जिसका उद्देश्य केवल व्यायाम नहीं, बल्कि भीतरी स्थिरता और मुक्ति है।

योग पर एक श्लोक

“yoga-sthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā dhanañjaya”

Bhagavad Gita 2.48 · Chapter 2, Sankhya Yoga

हे धनंजय! आसक्ति त्यागकर, सफलता और असफलता में समान रहते हुए, योग में स्थित होकर अपने कर्म कर। यही समत्व ही योग कहलाता है।

और श्लोक देखें (Gita Wisdom)

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योग — प्रश्न और उत्तर

योग का अर्थ क्या है? (Yoga meaning)

योग का अर्थ है मिलन — वे साधनाएँ जो व्यक्तिगत स्व को परमात्मा से जोड़ती हैं। इसमें कर्म, भक्ति, ज्ञान और ध्यान के मार्ग सम्मिलित हैं, और यह केवल शारीरिक आसनों से कहीं व्यापक है।

योग के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?

प्रमुख मार्ग हैं — कर्मयोग (निष्काम कर्म), भक्तियोग (भक्ति), ज्ञानयोग (ज्ञान), और राज या ध्यानयोग (ध्यान) — हर एक स्थिरता और मुक्ति की ओर एक राह।

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