हिंदू अवधारणा
मायाMaya
māyā — वह आभास जो परम सत्य को ढक देता है
In short
माया (Maya) आभास की शक्ति है — वह ढंग जिससे एक परम सत्ता (ब्रह्म) स्वयं को जगत् के अनेक बदलते रूपों में प्रकट करती है। अद्वैत वेदांत में यही वह शक्ति है जो नश्वर को नित्य और स्व को अलग प्रतीत कराती है — अज्ञान का वह आवरण जिसे आध्यात्मिक ज्ञान हटा देता है।
समीक्षित — गोडिफाई टीम · अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026
इसका अर्थ
माया का अर्थ यह नहीं कि जगत् बिल्कुल मिथ्या या शून्य है। यह उस रहस्यमयी शक्ति का नाम है जिससे एकमात्र निराकार सत्ता विशाल, बदलती अनेकता के रूप में प्रकट होती है — और जिससे हम उस आभास को ही पूर्ण सत्य मान बैठते हैं, नित्य को नश्वर में और स्व को छोटा व अलग समझ लेते हैं।
अद्वैत (अद्वय) वेदांत में मुक्ति माया के हट जाने में है: जगत् से भागने में नहीं, बल्कि भ्रम के पार उसके मूल सत्य को देख लेने में। एक प्रचलित उदाहरण है — मंद प्रकाश में रस्सी को साँप समझ लेना; जब तक भ्रम है तब तक भय सच्चा लगता है, और स्पष्ट देखते ही वह मिट जाता है।
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माया — प्रश्न और उत्तर
माया क्या है? (Maya meaning)
माया आभास की वह शक्ति है जिससे एक परम सत्ता स्वयं को जगत् के अनेक बदलते रूपों में प्रकट करती है। यही वह आवरण है जो नश्वर को नित्य और स्व को अलग प्रतीत कराता है।
क्या माया का अर्थ है कि जगत् मिथ्या है?
यह नहीं कि जगत् शून्य है — बल्कि यह कि हम उसे ग़लत समझते हैं, बदलते आभास को ही पूर्ण सत्य मान लेते हैं। आध्यात्मिक ज्ञान इस आवरण को हटाकर नीचे का सत्य प्रकट कर देता है।
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