हिंदू अवधारणा
मोक्षMoksha
mokṣa — मुक्ति — जन्म-मृत्यु के चक्र से छुटकारा
In short
मोक्ष (Moksha) अर्थात मुक्ति — हिंदू आध्यात्मिक जीवन का परम लक्ष्य: संसार, यानी जन्म-मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से छुटकारा। यह अज्ञान और दुःख से मुक्ति है, और अपने सच्चे स्वरूप (आत्मा) तथा उसकी परम सत्ता (ब्रह्म) के साथ एकता की अनुभूति है।
समीक्षित — गोडिफाई टीम · अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026
इसका अर्थ
मोक्ष चार पुरुषार्थों में सर्वोच्च है। जहाँ धर्म, अर्थ और काम जीवन को संसार के भीतर व्यवस्थित करते हैं, वहीं मोक्ष पूरे संसार-चक्र से मुक्ति है — उस अविद्या (अज्ञान) का अंत जो आत्मा को बार-बार जन्म-मरण में घुमाती रहती है।
भिन्न परंपराएँ मार्ग अलग बताती हैं — उपनिषदों का ज्ञान (ज्ञानयोग), प्रेममयी भक्ति, और निष्काम कर्म (कर्मयोग) — पर फल पर सब सहमत हैं: अपने सच्चे, अमर स्वरूप की पहचान और दुःख से मुक्ति। गीता का अंतिम उपदेश 'सर्वधर्मान् परित्यज्य' पूर्ण शरणागति द्वारा इसी मुक्ति का सबसे प्रिय आश्वासन है।
मोक्ष पर एक श्लोक
“sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śaraṇaṁ vraja”
Bhagavad Gita 18.66 · Chapter 18, Moksha-Sannyasa Yoga
सब धर्मों (बोझों) को त्यागकर केवल मेरी शरण में आ जा। मैं तुझे सब चिंताओं और पापों से मुक्त कर दूँगा — तू शोक मत कर।
और श्लोक देखें (Gita Wisdom)मोक्ष से जुड़े देवता
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मोक्ष — प्रश्न और उत्तर
मोक्ष क्या है? (Moksha meaning)
मोक्ष अर्थात मुक्ति — संसार, यानी जन्म-मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से छुटकारा। यह अज्ञान और दुःख से मुक्ति है, और अपने सच्चे स्वरूप की परम सत्ता के साथ एकता की अनुभूति है।
मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?
परंपरा कई मार्ग बताती है — ज्ञान (ज्ञानयोग), भक्ति और निष्काम कर्म (कर्मयोग) — जो सभी एक ही मुक्ति और आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाते हैं।
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