हिंदू अवधारणा
चार पुरुषार्थThe Four Purusharthas
puruṣārtha — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — जीवन के चार लक्ष्य
In short
चार पुरुषार्थ (Purusharthas) हिंदू चिंतन में मानव जीवन के चार उचित लक्ष्य हैं: धर्म (कर्तव्य व सदाचार), अर्थ (समृद्धि व आजीविका), काम (प्रेम, आनंद व जीवन के सुख), और मोक्ष (मुक्ति)। ये मिलकर संसार में भली-भाँति जिए गए और उससे परे की ओर उन्मुख जीवन की संतुलित दृष्टि देते हैं।
समीक्षित — गोडिफाई टीम · अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026
इसका अर्थ
हिंदू परंपरा सांसारिक जीवन को आध्यात्मिक जीवन के विरुद्ध नहीं रखती, बल्कि दोनों को संतुलन में रखती है। अर्थ (ईमानदार समृद्धि और जीविका के साधन) और काम (प्रेम, सौंदर्य और उचित आनंद) अच्छे और आवश्यक लक्ष्य हैं — बशर्ते वे धर्म के भीतर रहकर साधे जाएँ, जो इन्हें दिशा और संयम देता है।
मोक्ष — मुक्ति — चौथा और सर्वोच्च लक्ष्य है, जिसकी सेवा शेष तीन अंततः करते हैं। जो जीवन कर्तव्य का आदर करे, उचित रीति से कमाए और भोगे, और अपना मुख मुक्ति की ओर रखे — वही इस दृष्टि में पूर्ण जीवन है: संसार में संलग्न, फिर भी उससे बँधा हुआ नहीं।
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चार पुरुषार्थ — प्रश्न और उत्तर
चार पुरुषार्थ कौन-से हैं? (Four purusharthas)
चार पुरुषार्थ मानव जीवन के लक्ष्य हैं: धर्म (कर्तव्य व सदाचार), अर्थ (समृद्धि व आजीविका), काम (प्रेम व आनंद), और मोक्ष (मुक्ति) — भली-भाँति जिए गए जीवन की संतुलित दृष्टि।
क्या हिंदू धर्म में धन और सुख स्वीकार्य हैं?
हाँ — अर्थ (समृद्धि) और काम (आनंद) जीवन के वैध लक्ष्य हैं, बशर्ते वे धर्म के भीतर रहकर साधे जाएँ। हिंदू चिंतन सांसारिक समृद्धि को मुक्ति के उच्चतर लक्ष्य के साथ संतुलित करता है।
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