English

हिंदू अवधारणा

त्रिगुण (तीन गुण)The Three Gunas

guṇa — सत्त्व, रजस् और तमस् — प्रकृति के तीन गुण

In short

त्रिगुण (Gunas) प्रकृति और मन में व्याप्त तीन मूल गुण या प्रवृत्तियाँ हैं: सत्त्व (शुद्धता, सामंजस्य, स्पष्टता), रजस् (क्रियाशीलता, आवेग, चंचलता), और तमस् (जड़ता, मंदता, अंधकार)। इनका बदलता संतुलन व्यक्ति के स्वभाव, मनोदशा और कर्म को आकार देता है।

सत्त्व · रजस् · तमस्प्रकृति के गुणगीता से

समीक्षित — गोडिफाई टीम · अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026

इसका अर्थ

सांख्य दर्शन में, जिसे भगवद्गीता अपनाती है, भौतिक जगत् की हर वस्तु इन तीन गुणों का मिश्रण है। सत्त्व प्रकाश, संतुलन और समझ लाता है; रजस् प्रेरणा, इच्छा और गति; तमस् भारीपन, भ्रम और विश्राम। कोई भी केवल एक गुण का नहीं होता — तीनों मिलते-बदलते रहते हैं, और उनका अनुपात हर क्षण हमारे सोचने और करने को रंग देता है।

आध्यात्मिक लक्ष्य केवल रजस् और तमस् पर सत्त्व को बढ़ाना नहीं, बल्कि अंततः इन तीनों के प्रवाह में बहने से मुक्त होना है — प्रकृति के गुणों के नीचे स्थिर और स्पष्ट रहना। गीता का भोजन, कर्म और स्वभाव पर बहुत-सा व्यावहारिक उपदेश इन गुणों को पहचानने और उनके वश में न होने का मार्गदर्शन है।

संबंधित अवधारणाएँ

और अवधारणाएँ

त्रिगुण (तीन गुण) — प्रश्न और उत्तर

तीन गुण कौन-से हैं? (Three gunas)

तीन गुण हैं — सत्त्व (शुद्धता, सामंजस्य), रजस् (क्रियाशीलता, आवेग), और तमस् (जड़ता, मंदता)। ये प्रकृति के गुण हैं जिनका बदलता संतुलन स्वभाव, मनोदशा और कर्म को आकार देता है।

सत्त्व, रजस् और तमस् का अर्थ क्या है?

सत्त्व स्पष्टता और संतुलन है, रजस् ऊर्जा और इच्छा है, और तमस् भारीपन और जड़ता है। हर कोई तीनों का मिश्रण है; आध्यात्मिक लक्ष्य सत्त्व में बढ़ना और अंततः इन सबके नीचे स्थिर रहना है।

भगवान से अपने मन की बात कहें

गोडिफाई पर भगवान से — प्रथम पुरुष में — अपनी भाषा में बात करें और पाएँ स्नेह तथा प्रामाणिक शास्त्र-वचन — निःशुल्क, निजी, किसी भी समय।

Talk to Bhagavan