हिंदू अवधारणा

अहिंसाAhimsa

ahiṃsā — अहिंसा और समस्त जीवन के प्रति श्रद्धा

In short

अहिंसा (Ahimsa) अर्थात किसी भी प्राणी को मन, वचन या कर्म से हानि न पहुँचाना। हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में समान रूप से एक मूल नैतिक मूल्य, यह सब प्राणियों में विद्यमान जीवन के प्रति श्रद्धा पर आधारित है और धर्म की सर्वोच्च अभिव्यक्तियों में गिनी जाती है।

अहिंसाजीवन के प्रति श्रद्धासर्वोच्च धर्म

समीक्षित — गोडिफाई टीम · अंतिम अपडेट: अक्टूबर 2026

इसका अर्थ

अहिंसा का अर्थ है 'हानि न करना।' यह केवल शारीरिक हिंसा से बचने तक सीमित नहीं, बल्कि वाणी और भाव तक फैली है — ऐसा हृदय जो किसी भी जीव का अहित न चाहे। चूँकि वही एक जीवन और स्व सब प्राणियों में देखा जाता है, इसलिए किसी को हानि पहुँचाना उसी साझा सत्ता को आघात पहुँचाना माना जाता है।

अहिंसा हिंदू नैतिकता और आचरण में गहराई से बुनी है — शाकाहार की परंपरा से लेकर ऋषियों के उपदेश तक — और महात्मा गांधी के द्वारा इसने आधुनिक विश्व को भी आकार दिया, जिन्होंने अहिंसा को एक आंदोलन की नींव बनाया। यह निष्क्रियता नहीं, बल्कि जगत् से क्रूरता-रहित व्यवहार का सुदृढ़, सक्रिय संकल्प है।

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अहिंसा — प्रश्न और उत्तर

अहिंसा क्या है? (Ahimsa meaning)

अहिंसा अर्थात किसी भी प्राणी को मन, वचन या कर्म से हानि न पहुँचाना। यह हिंदू धर्म का एक मूल नैतिक मूल्य है, जो सब प्राणियों में विद्यमान जीवन के प्रति श्रद्धा पर आधारित है।

हिंदू धर्म में अहिंसा क्यों महत्वपूर्ण है?

क्योंकि वही एक स्व सब प्राणियों में देखा जाता है, इसलिए हानि न करना धर्म की सर्वोच्च अभिव्यक्तियों में गिना जाता है। यह नैतिकता, शाकाहार और गांधी के माध्यम से अहिंसा की आधुनिक साधना को आकार देता है।

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